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देश में दर्ज हुए जानवरों पर अत्याचार के आंकड़े, 9 हजार से ज्यादा मामले आए सामने

Shivani Jha | 08 May, 2026

NCRB Data On Crime: देश में पहली बार जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों का पूरा रिकॉर्ड सरकारी अपराध आंकड़ों में शामिल किया गया है। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने अपनी रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ में पहली बार पशु क्रूरता से जुड़े मामलों को अलग कैटेगरी में दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में देशभर में जानवरों के खिलाफ क्रूरता के 9,039 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यानी हर दिन कई लोग जानवरों को मारने, जहर देने, घायल करने या उनके साथ क्रूरता करने के आरोप में पकड़े गए।

मामलों में चार्जशीट दाखिल 

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि इन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 96.7 प्रतिशत रही, जो काफी ज्यादा मानी जा रही है। वहीं अदालतों में दोष साबित होने की दर 80.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में मामलों में कोर्ट ने आरोपियों को दोषी माना है। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में केस अदालतों में लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 82 प्रतिशत मामले अब भी कोर्ट में चल रहे हैं। वहीं 147 मामलों को सबूतों की कमी या कोई सुराग नहीं मिलने के कारण बंद कर दिया गया। दो मामलों को कानूनी कारणों और आरोपी की मौत की वजह से खत्म किया गया।

जानवरों को मारना है अपराध

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जानवरों को मारना, जहर देना या घायल करना अपराध है। ऐसे मामलों में Ministry of Home Affairs के तहत लागू पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।

पशु चोरी के मामलों का भी जिक्र

एनसीआरबी रिपोर्ट में पशु चोरी के मामलों का भी जिक्र किया गया है। साल 2024 में देशभर में पशु चोरी के 8,660 मामले दर्ज हुए। चोरी हुए पशुओं की कुल कीमत करीब 48.8 करोड़ रुपये बताई गई। इनमें से करीब 45 प्रतिशत मामलों में पशुओं को बरामद कर मालिकों को वापस सौंप दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों के खिलाफ हिंसा और इंसानों के खिलाफ अपराधों के बीच गहरा संबंध होता है। उनका मानना है कि अब राष्ट्रीय स्तर पर डेटा उपलब्ध होने से ऐसे अपराधों को रोकने की रणनीति और मजबूत बनाई जा सकेगी। 

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