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रुपये में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट, शेयर बाजार में भारी टूट; तेल संकट से बढ़ी चिंता

Shivani Jha | 12 May, 2026

Stock Market News: अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार 12 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.50 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही रुपये में 19 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछला बंद स्तर 95.31 था। लगातार गिरावट से निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

क्यों बढ़ा ये तनाव?

जानकारों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव और बढ़ गया। इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं। तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारतीय बाजार पर भी असर देखने को मिला।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना रहता है तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले समय में हालात और मुश्किल हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने की जनता से अपील

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने और सोने की खरीद में संयम बरतने की अपील की है। माना जा रहा है कि इस बयान के बाद गोल्ड लिंक्ड डॉलर में तेजी आई और निवेशकों का भरोसा भी कमजोर हुआ। रुपये में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 830 अंक टूटकर 75,188 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी में 230 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,580 के आसपास पहुंच गया। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी करीब 560 अंक नीचे चला गया।

जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में भी कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं। वहीं, सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अगर तेल सप्लाई में बाधा जारी रही तो वैश्विक बाजार में स्थिरता लौटने में 2027 तक का समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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