Supreme Court SIR Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने आज SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को पूरी तरह वैधानिक करार दिया है। उन्होंने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग के संवैधानिक दायित्व के अनुरूप है और इससे निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित होते हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की व्यापक शक्तियों के दायरे में आती है। मतदाता सूचियों की नियमित सफाई जैसे मृत, फर्जी और प्रवासी मतदाताओं के नाम हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। मतदाता सूची को अपडेट करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का हिस्सा है। यह चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है। इसलिए SIR की प्रक्रिया को कानून के खिलाफ कहना गलत होगा।
क्या है SIR का पूरा मामला?
दरअसल, चुनाव आयोग ने साल 2025 में बिहार से शुरू करके अब देश के कई राज्यों में SIR अभियान चलाया, जिसमें लाखों नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया मनमानी है। इसके अलावा दस्तावेजों का बोझ बढ़ाती है और योग्य मतदाताओं को बाहर कर सकती है। वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि SIR कोई नई या असाधारण प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता सूचियों की नियमित सफाई का हिस्सा है, जो पिछले 20 वर्षों में पहली बार बड़े पैमाने पर की गई है।