Ahmedabad Dosa Death Case: गुजरात के अहमदाबाद में चांदखेड़ा इलाके का डोसा डेथ केस अब एक साधारण फूड पॉइजनिंग से आगे बढ़कर खौफनाक हत्याकांड का रूप ले चुका है। शुरू में बाजार के डोसा बैटर से दो मासूम बेटियों की मौत का मामला सामने आया था, लेकिन फॉरेंसिक जांच और मां की डायरी ने पूरे मामले का रुख बदल दिया। पुलिस अब माता-पिता पर बेटे की लालच में जानबूझकर जहर देने का शक जता रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 1 अप्रैल का है। विमल प्रजापति और उनकी पत्नी भावना ने स्थानीय घनश्याम डेरी से डोसा बैटर खरीदा। घर पर बनाए डोसा खाने के बाद पूरा परिवार बीमार पड़ गया। जिस वजह से तीन महीने की छोटी बेटी मिश्री की 3 अप्रैल को मौत हो गई, जबकि चार साल की बड़ी बेटी राहा ने भी कुछ दिन बाद दम तोड़ दिया। माता-पिता दोनों अस्पताल में भर्ती रहे, लेकिन उनकी हालत सुधर गई।
शुरुआती जांच में डेरी के डोसा बैटर पर शक हुआ, लेकिन अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 200 से ज्यादा अन्य ग्राहकों के सैंपल लिए, जिनमें कोई समस्या नहीं मिली। फूड सेफ्टी लैब (FSL) रिपोर्ट में बैटर में कोई मिलावट या बैक्टीरिया नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस ने घर की तलाशी ली।
डौसा में जहर मिलाकर खिलाया
टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में दोनों बच्चियों और माता-पिता के ब्लड में एल्युमिनियम फॉस्फाइड (सेल्फोस) नामक घातक कीटनाशक की भारी मात्रा मिली। यह वही जहर है जो अनाज संरक्षक और चूहा मारने वाली दवा में इस्तेमाल होता है। पुलिस को घर से सेल्फोस के पैकेट भी बरामद हुए। पूछताछ में पता चला कि पिता विमल ने 10 पैकेट खरीदे थे।
सबसे बड़ा सबूत था भावना की पर्सनल डायरी , जो उनके माता-पिता के घर से मिली। डायरी में बार-बार बेटे की इच्छा और मन्नत का जिक्र है। भावना ने लिखा था कि अगर बेटा हुआ तो शिव मंदिर जाकर मन्नत पूरी करेगी। ऐसे में पुलिस का मानना है कि बेटियों के जन्म के बाद दंपति ने बेटे की चाहत में दोनों बच्चियों को जानबूझकर जहर दिया, जबकि खुद हल्का डोज लेकर बच गए ताकि किसी को भी शक न हो।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा 'डायरी और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट दोनों ही संदेहास्पद हैं। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। बच्ची को डोसा खिलाने का दावा भी संदिग्ध है क्योंकि तीन महीने की बच्ची को ठोस भोजन नहीं दिया जाता।' पुलिस ने डेरी के सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं।