Trump China Warning Iran Weapons: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी शांति वार्ता बेनतीजा रही। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में 21 घंटे से ज्यादा चली बैठकें किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकीं। इस असफलता के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे सख्त चेतावनी दी है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को खबर मिली है कि चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को नई एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य हथियार पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा 'अगर चीन ऐसा करता है, तो चीन को बड़ी मुश्किलें होंगी।' उन्होंने यह बयान व्हाइट हाउस से बाहर निकलते हुए पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
वार्ता क्यों फेल हुई?
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की लंबी अवधि की स्पष्ट प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए पूरी तरह खोलने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने रहे। वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” रखा था, लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया।
दूसरी तरफ, ईरानी पक्ष ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अत्यधिक और अनुचित मांगें रखीं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि वार्ता की सफलता इस पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष कितनी ईमानदारी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 24 घंटे की चर्चा में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में छूट, युद्ध के मुआवजे और पूरे क्षेत्र से संघर्ष समाप्त करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यथार्थवादी और संतुलित रुख अपनाए।
चीन पर ट्रंप का हमला
इसी बीच, ट्रंप ने चीन पर ईरान को हथियार सप्लाई करने की कोशिश का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि अगर बीजिंग ऐसा कदम उठाता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि ट्रंप ने ऐसे देशों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जो ईरान को हथियार मुहैया कराते हैं। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान न सिर्फ ईरान बल्कि चीन के साथ बढ़ते तनाव को भी दर्शाता है। चीन पहले ही ईरान का प्रमुख आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार के मजबूत संबंध हैं।