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हज यात्रियों को देना होगा 10,000 अतिरिक्त शुल्क, ओवैसी ने किया फैसले का विरोध

Shivani Jha | 01 May, 2026

Haj Fare: हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हज यात्रियों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके अनुसार सभी यात्रियों को ₹10,000 का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यह राशि “डिफरेंशियल एयरफेयर” के रूप में ली जा रही है। इस फैसले के बाद यात्रियों और राजनीतिक दलों में बहस शुरू हो गई है। कमेटी के अनुसार यह अतिरिक्त शुल्क विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों के कारण लिया जा रहा है। बताया गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और अमेरिका, इजरायल तथा ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति के कारण एयरफेयर में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से यह अतिरिक्त बोझ यात्रियों पर पड़ा है।

डिजिटल माध्यम से होगा भुगतान

यात्रियों को यह भुगतान डिजिटल माध्यम से करना होगा। इसके लिए वे हज सुविधा ऐप का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा नेटबैंकिंग, कार्ड या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में चालान के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है। तेलंगाना राज्य हज कमेटी के अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला अचानक लिया गया है, जिससे कई यात्रियों को परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि कुछ यात्री पहले ही अपनी यात्रा की तैयारी पूरी कर चुके हैं और अब अंतिम समय में अतिरिक्त राशि देना उनके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।

हैदराबाद से शुरू होगी उड़ान

इस साल लगभग 9,960 यात्री हज यात्रा पर जाने वाले हैं। इनमें 37 महिलाएं ऐसी हैं जो बिना किसी पुरुष साथी के यात्रा करेंगी। हैदराबाद से पहली उड़ान 4 मई को रवाना होने की संभावना है। इस फैसले का राजनीतिक स्तर पर भी विरोध शुरू हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस अतिरिक्त शुल्क को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हज यात्री वर्षों तक पैसे जोड़कर यह धार्मिक यात्रा करते हैं और उन पर अचानक बोझ डालना सही नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार से इस आदेश को वापस लेने की अपील भी की।

ओवैसी ने कहा ये शोषण है 

इसे लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से इस सर्कुलर को वापस लेने की अपील की है। ओवैसी ने कहा है कि 10 हजार रुपया का एक्स्ट्रा चार्ज महज एक शोषण है।

सरकार ने किया फैसले का बचाव

वहीं, सरकार की ओर से इस फैसले का बचाव किया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने कहा है कि यह निर्णय पूरी तरह कानूनी और हित में लिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, एयरलाइंस ने बढ़ी हुई ATF कीमतों के कारण प्रति यात्री 300 से 400 अमेरिकी डॉलर की मांग की थी। लेकिन बातचीत के बाद इसे घटाकर केवल 100 डॉलर प्रति यात्री कर दिया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम यात्रियों को बड़े आर्थिक बोझ से बचाने के लिए लिया गया है और हज यात्रा को सस्ता और आसान बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। 

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