Bengal Election: बंगाल चुनाव के 4 मई को आने वाले चुनाव नतीजों का सबको बेसब्री से वेट कर रहे हैं। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने का दावा ठोक रही है।
राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और कई जगह कड़ा मुकाबला टाइट होने की उम्मीद है। ऐसे में नतीजों का अनुमान लगाना कठीन हो जाता है, लेकिन चुनाव विशलेषक 37 खास सीटों को बेहद अहम बताते हैं। इन सीटों को 'बेलवेदर सीट्स' कहा जाता है, क्योंकि 1977 से अब तक जिस पार्टी ने इन सीटों में ज्यादा जीत हासिल की है, वही पार्टी सत्ता में आई है।
37 सीटों पर मुकाबला टाइट
इनमें से 15 से 20 प्रतिशत सीटें कोलकाता, दक्षिण बंगाल और दक्षिण-पश्चिम बंगाल के इलाकों में आती है। भवानीपुर, डायमंड हार्बर, आउसग्राम, उदयनारायणपुर और माघराट पूर्व जैसी सीटें अक्सर सत्ता हासिल करने वाली पार्टी की झोली में जाती है। चुनाव विश्लेषक दोराब सोपारीवाला के अनुसार, पूरे देश की ‘सुपर बेलवेदर’ सीटों को जोड़ दिया जाए, तब भी वे बंगाल की इन 37 सीटों के बराबर नहीं ठहरती है।
बंगाल की राजनीति पृष्ठभूमि अलग
चुनावी विशलेषक का मानना है कि कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक ऐसी सीट है जिसका रिकॉर्ड पूरी तरह सही रहा है, जबकि बिहार और महाराष्ट्र में एक भी ऐसी सीट नहीं है। मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में 3-3, ओडिशा और गुजरात में 5-5 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या 37 है। यह अंतर बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण है, जहां लंबे समय तक एक ही पार्टी का दबदबा रहा।