West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को देखते हुए शराब बिक्री पर रोक पहले ही लागू कर दी गई है। आमतौर पर यह रोक मतदान से दो दिन पहले लगती है, लेकिन इस बार इसे पहले ही लागू कर दिया गया है क्योंकि राज्य में 23 अप्रैल को मतदान होना है। जिन क्षेत्रों में मतदान होना है, वहां गुरुवार से ही शराब की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी गई है।
निर्वाचन आयोग का बयान
भारत निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में कहा है कि राज्य में शराब की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। आयोग के अनुसार, निगरानी के दौरान यह पाया गया कि इस वर्ष अप्रैल महीने में पिछले साल की तुलना में शराब की बिक्री काफी ज्यादा हुई है। आयोग ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल राज्य बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के डिपो से रिटेलरों द्वारा शराब की खरीद में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा कई संवेदनशील दुकानों की पहचान भी की गई है, जहां शराब की बिक्री सामान्य से अधिक पाई गई है।
चुनाव आयोग ने लिया फैसला
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने ये फैसला लिया है कि मतदान से पहले शराब की बिक्री पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनी रहे। इस बार पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी राज्य में सरकार बनाने का दावा कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस ने आयोग पर लगाया आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी, स्थानीय निकाय या स्वायत्त संस्था के अधिकारी को चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। चुनाव आयोग द्वारा कई जिलों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले भी किए गए हैं, जिससे राज्य सरकार और सत्ताधारी दल नाराज हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने आयोग पर विपक्ष का पक्ष लेने का आरोप लगाया है, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया है। अब राज्य में चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है और सभी की नजरें मतदान प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।