Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही नाजुक सीजफायर की स्थिति एक बार फिर खतरे में पड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज की खाड़ी के पास ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज 'तौस्का' को जबरन रोका, उसकी इंजन रूम में गोलीबारी की और अमेरिकी मरीन ने जहाज पर कब्जा कर लिया। बता दें, यह घटना अमेरिकी नौसेना की ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी के दौरान हुई पहली बड़ी कार्रवाई है।
दूसरी तरफ, ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा 'ईरानी झंडे वाला लगभग 900 फीट लंबा कार्गो जहाज तौस्का हमारे नौसेना ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रुएंस ने इसे छह घंटे तक चेतावनी दी, लेकिन क्रू ने नहीं माना। इसलिए हमने इंजन रूम में छेद कर दिया और जहाज को रोक लिया। अब मरीन इसके बोर्ड पर हैं और देख रहे हैं कि क्या सामान है।'
ईरान का तीखा विरोध
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान (खातम अल-अंबिया) ने इस घटना को 'सीजफायर का उल्लंघन' और 'समुद्री लूट' करार दिया है। तेहरान ने चेतावनी दी कि वह जल्द ही जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई युद्धविराम की भावना के खिलाफ है, जो अप्रैल की शुरुआत में लगाया गया था और इस सप्ताह समाप्त होने वाला है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक बंद रखने की घोषणा की है, जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी नहीं हटाता।
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इस्लामाबाद शांति वार्ता पर संकट
इसी बीच, इस्लामाबाद शांति वार्ता पर संकटमंडरा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचेंगे, जहां ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, ईरान की ओर से इसका उलट कहा गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि तेहरान ने अभी तक वार्ता के लिए अपनी टीम भेजने का फैसला नहीं किया है और नाकेबंदी हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है। पहले दौर की वार्ता अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई थी, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका था। ईरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध हटाने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी शर्तें रखे हुए है।