<rss xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" version="2.0"><channel><title>Khabarfast</title><atom:link href="https://www.khabarfast.com/rss-feed/health" rel="self" type="application/rss+xml" /><link>https://www.khabarfast.com/</link><description/><lastBuildDate>Thu, 09 Apr 2026 18:52:20 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.khabarfast.com</generator><item><title><![CDATA[World TB Day 2026: भारत में कम हो रहे टीबी के मामले, जानिए कैसे पहचानें और क्या है लक्षण और इलाज]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/health-update-world-tuberculosis-tb-day-2026-cases-are-declining-in-india-know-here-how-to-identify-symptoms-and-treatment</link><pubDate>Tue, 24 Mar 2026 10:10:52 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/health-update-world-tuberculosis-tb-day-2026-cases-are-declining-in-india-know-here-how-to-identify-symptoms-and-treatment</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1774327252240326.png"> TB Cases India 2026:हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाका है। लेकिन ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है – क्या टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है? तो जवाब है हां! अगर लक्षण दिखते ही जांच हो जाए और डॉक्टर के बताए मुताबिक पूरा इलाज लिया जाए तो टीबी 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में जड़ से खत्म हो जाती है।

	नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के तहत भारत में ड्रग-सेंसिटिव टीबी का सफलता दर 90 प्रतिशत पहुंच चुका है, जो वैश्विक औसत 88 प्रतिशत से बेहतर है। ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के लिए भी नई शॉर्ट-कोर्स दवाएं (जैसे BPaLM रेजिमेन) उपलब्ध हैं, जिनसे 6 महीने में ही 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं। WHO Global TB Report 2025 भी यही पुष्टि करता है कि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह नियंत्रित और ठीक हो सकती है।

	भारत में टीबी का हाल

	WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के नए केस में 21% की कमी आई यानी 237 प्रति लाख से घटकर 187 प्रति लाख हो गई। यह वैश्विक औसत गिरावट (12%) से लगभग दोगुनी रफ्तार है। मृत्यु दर भी 28 प्रति लाख से घटकर 21 प्रति लाख रह गई। ट्रीटमेंट कवरेज 53% से बढ़कर 92% हो गया और 2024 में 26.18 लाख मरीजों का पता चला। भारत अभी भी वैश्विक टीबी बोझ का 25% हिस्सा वहन करता है, लेकिन ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत प्रगति तेज है।

	टीबी के मुख्य संकेत 

	टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। अगर ये लक्षण 2 हफ्ते से ज्यादा रहें तो तुरंत जांच कराएं। बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज या एचआईवी वाले मरीजों में खतरा ज्यादा होता है। शुरुआत में लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन अनदेखा करने पर फैल सकता है।

	• लगातार खांसी (कभी खून भी आए)

	• हल्का बुखार, खासकर रात में पसीना

	• बिना वजह वजन कम होना

	• थकान और कमजोरी

	• सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ

	• भूख न लगना 

	टीबी का इलाज और बचाव 

	भारत में इलाज पूरी तरह मुफ्त है। सामान्य टीबी का कोर्स 6 महीने का होता है – पहले 2 महीने 4 दवाएं (रिफैम्पिसिन, आइसोनियाजिड, पाइरेजिनामाइड, एथाम्बुटॉल) और अगले 4 महीने 2 दवाएं। MDR/XDR टीबी के लिए BPaLM जैसी नई दवाएं मात्र 6 महीने में ही असरदार साबित हो रही हैं। Ni-kshay पोषण योजना के तहत हर मरीज को हर महीने ₹1000 की सहायता मिलती है। Nikshay पोर्टल पर हर केस की निगरानी होती है। 

	बचाव के उपाय

	• बच्चों को BCG वैक्सीन लगवाएं

	• परिवार के संपर्क में आने वालों को प्रिवेंटिव दवा दें

	• अच्छा पोषण, स्वच्छता और घर में वेंटिलेशन रखें

	• धूम्रपान और शराब से दूर रहें]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1774327252240326.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[सावधान! घंटों बैठे रहने से बढ़ रहा डीप वेन थ्रोमबोसिस का रिस्क, इन लोगों के लिए बन सकती है जानलेवा]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-sitting-for-long-hours-increases-the-risk-of-deep-vein-thrombosis-in-young-adults-know-here</link><pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:08:24 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-sitting-for-long-hours-increases-the-risk-of-deep-vein-thrombosis-in-young-adults-know-here</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1774262304230326.png"> Deep Vein Thrombosis Risk: आज की लाइफस्टाइल की वजह से युवाओं में डीप वेन थ्रोमबोसिस (DVT) यानी गहरी नसों में खून का थक्का जमने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने से खून का प्रवाह रुक जाता है, जिससे पैरों की गहरी नसों में थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति &apos;सिटिंग डिजीज&apos; या &apos;इकोनॉमी क्लास सिंड्रोम&apos; के नाम से भी जानी जाती है। हाल के सालों में 23से 45साल के युवाओं में DVT के मामलों में लगभग 50प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, खासकर धूम्रपान करने वालों और लंबे समय तक डेस्क जॉब, गेमिंग, OTT प्लेटफॉर्म बिंज-वॉचिंग या लंबी यात्रा करने वालों में।

	युवाओं में क्यों बढ़ रहा है DVT का खतरा? 

	पहले DVT को मुख्य रूप से बुजुर्गों या अस्पताल में भर्ती मरीजों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह युवा पेशेवरों में आम हो गई है। इसके कारणों में -

	1. लंबे समय तक एक ही जगह बैठना (WFH, ऑफिस डेस्क जॉब, लंबी फ्लाइट या ट्रेन यात्रा) 

	2. खराब हाइड्रेशन (पानी कम पीना) 

	3. धूम्रपान 

	4. मोटापा 

	5. हार्मोनल गोलियां (कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स) 

	6. आनुवंशिक कारक या परिवार में पहले से थक्के की समस्या

	डॉक्टरों का कहना है कि हर अतिरिक्त घंटे बैठने से DVT का जोखिम करीब 10प्रतिशत बढ़ जाता है। अगर थक्का टूटकर फेफड़ों में पहुंच जाए तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म बन सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युवाओं में यह &apos;साइलेंट किलर&apos; बन रहा है, क्योंकि शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं और लोग इग्नोर कर देते हैं।

	DVT के प्रमुख लक्षण  

	1. एक पैर या हाथ में अचानक सूजन 

	2. पैर में दर्द, ऐंठन या खिंचाव जैसा महसूस होना

	3. प्रभावित जगह पर गर्माहट या लालिमा 

	4. त्वचा का रंग बदलना (लाल, नीला या बैंगनी)

	रोकथाम के आसान उपाय  

	1. हर 1-2घंटे में उठकर 5-10मिनट टहलें या पैर हिलाएं 

	2. लंबी बैठाई के दौरान पैरों की एक्सरसाइज करें (एंकल रोटेशन, पैर ऊपर-नीचे करना) 

	3. खूब पानी पिएं, डिहाइड्रेशन से बचें 

	4. धूम्रपान छोड़ें 

	5. स्वस्थ वजन बनाए रखें और नियमित व्यायाम करें]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1774262304230326.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[Chaitra Navratri 2026: कब से शुरू होंगे नवरात्र? जानें इस बार 8 दिन या पूरे 9 दिन का व्रत]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/chaitra-navratri-2026-when-will-navratri-begin-find-out-if-it-will-be-an-8-day-fast-or-a-full-9-day-fast-this-time</link><pubDate>Mon, 16 Mar 2026 15:20:21 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/chaitra-navratri-2026-when-will-navratri-begin-find-out-if-it-will-be-an-8-day-fast-or-a-full-9-day-fast-this-time</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1773654621160326.png"> Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है। साल 2026 में नवरात्रि की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है। चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 19 मार्च 2026 से हो रहा है लेकिन आखिरी दिन के लिए लोगों के मन थोड़ा कन्फ्यूजन चल रहा है कि अतिंम दिन 26 या 27 मार्च होगा और इस बार पूरे 9 दिन के नवरात्र होंगे या केवल 8 दिन। चलिए जानते हैं।

	पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 मार्च 2026 को इसका समापन किया जाएगा। इस वर्ष अष्टमी और नवमीं 26 मार्च को ही मनाई जाएगी। प्रतिपदा तिथि के अनुसार इसी दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है और मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू होती है।चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त - 19 मार्च 2026 को 06:52 AM से 09:44 AMतक है।

	इस बार 8 दिन या 9 दिन?

	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार 8 दिन के नवरात्र मनाए जाएंगे। यानी श्रद्धालु 8 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे। अष्टमी के दिन ही राम नवमी का भी पर्व मनाया जाएगा।

	नवरात्रि का महत्व

	नवरात्रि के नौ दिन देवी शक्ति की आराधना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और घरों में कलश स्थापनाकर मां दुर्गा की पूजा करते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1773654621160326.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[Holi Diet: होली की मस्ती के बीच सेहत न हो खराब, इन 5 हेल्थ टिप्स को जरूर करें फॉलो]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-follow-these-holi-diet-tips-to-avoid-any-health-issues-during-the-holi-celebrations</link><pubDate>Fri, 27 Feb 2026 16:01:59 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-follow-these-holi-diet-tips-to-avoid-any-health-issues-during-the-holi-celebrations</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1772188319270226.png"> Holi Diet Tips: होली का त्योहार रंगों, खुशियों और स्वादिष्ट व्यंजनों से भरा होता है, लेकिन उत्साह में अगर खान-पान और कुछ जरूरी सावधानियों पर ध्यान न दिया जाए तो पेट खराब, एसिडिटी, फूड पॉइजनिंग, डिहाइड्रेशन या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, होली के दौरान तला-भुना, मीठा और मिलावटी भोजन सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। साल 2026में होली 04मार्च को मनाई जाएगी, इससे पहले उन टिप्स को जान लें, जिन्हें अपनाकर आप बीमार होने से बच सकते हैं।

	होली पर रखें सेहत का ध्यान 

	1. ज्यादा तला-भुना और मीठा खाने से बचें

	होली पर गुजिया, पकौड़े, नमकीन, जलेबी, ठंडाई और फ्राइड स्नैक्स का बोलबाला रहता है। इनका ज्यादा सेवन अपच, एसिडिटी, पेट में भारीपन, ब्लड शुगर स्पाइक और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण बन सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इनका सेवन सीमित मात्रा में करें और घर के बने हल्के व्यंजनों को प्राथमिकता दें।

	2. पानी और हाइड्रेशन का ध्यान रखें

	रंग खेलते हुए पसीना निकलता है और बाहर रहने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। कई लोग पानी कम पीते हैं, जिससे थकान, सिरदर्द या गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक जैसी समस्या हो सकती है। होली से पहले, दौरान और बाद में खूब पानी, नारियल पानी, नींबू पानी या ORS पिएं। ठंडाई या कोल्ड ड्रिंक्स ज्यादा न लें।

	3. मिलावटी या स्ट्रीट फूड से परहेज करें 

	होली के समय मिठाइयों, ठंडाई और स्नैक्स में मिलावट का खतरा बढ़ जाता है। दूध, मावा, घी या मसालों में मिलावट से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त या संक्रमण हो सकता है। घर पर बने ताजा और स्वच्छ भोजन को चुनें। स्ट्रीट फूड या अनजान स्रोत से पानी/ड्रिंक्स न लें।

	4. भांग या शराब का अत्यधिक सेवन करना 

	कई जगहों पर भांग वाली ठंडाई या अल्कोहल का सेवन आम है। ज्यादा मात्रा में लेने से चक्कर, डिहाइड्रेशन, एक्सीडेंट या पेट की गड़बड़ी हो सकती है। अगर लेना ही है तो कम मात्रा में और जिम्मेदारी से लें। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे दूर रहना चाहिए।

	5. खाने के बाद तुरंत रंग खेलना 

	खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी या रंग खेलने से पाचन बिगड़ सकता है। पहले हल्का नाश्ता करें, फिर रंग खेलें और बाद में संतुलित भोजन लें। होली के बाद हल्का, पौष्टिक भोजन जैसे फल, सब्जियां, स्प्राउट्स और सूप लें ताकि शरीर डिटॉक्स हो सके।

	होली का मजा लेने के लिए संतुलित खान-पान और हाइड्रेशन सबसे जरूरी है। अगर कोई पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज, एसिडिटी या एलर्जी है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इन सावधानियों से होली खुशहाल और सेहतमंद बनी रहेगी।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1772188319270226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[बच्चों से बुजुर्गों तक...रोजाना कितने अंडे खाना सही, उम्र के हिसाब से तय करें डाइट]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-from-children-to-the-elderly-how-many-eggs-is-right-to-eat-daily</link><pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:11:27 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-from-children-to-the-elderly-how-many-eggs-is-right-to-eat-daily</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771922487240226.png"> Age-Wise Egg Intake: अंडे को &apos;सुपरफूड&apos; कहा जाता है, क्योंकि ये उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन (A, D, E, B12), कोलीन, ल्यूटिन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। लेकिन कई लोग बिना सोचे-समझे रोजाना 4-5या इससे ज्यादा अंडे खा लेते हैं, जो कुछ मामलों में कोलेस्ट्रॉल या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। हाल की रिसर्च और स्वास्थ्य संगठनों (जैसे ICMR-NIN 2024, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन, 2025-2030 Dietary Guidelines for Americans) के अनुसार, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक गतिविधि के आधार पर अंडों की सुरक्षित मात्रा अलग-अलग होती है। स्वस्थ लोगों के लिए रोज 1-2अंडे ज्यादातर सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन ज्यादा खाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लें।

	उम्र के हिसाब से कितना खाएं अंडा? 

	1. 1-5साल के बच्चे:आधा से 1पूरा अंडा रोज। ये दिमाग के विकास, हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए जरूरी पोषक तत्व देते हैं। ज्यादा देने से एलर्जी या पाचन समस्या हो सकती है।

	2. 6-12साल के बच्चे:1अंडा रोज। ग्रोथ स्पर्ट के दौरान प्रोटीन और विटामिन D की जरूरत बढ़ती है, अंडा अच्छा स्रोत है।

	3. 13-18साल के किशोर (विशेषकर लड़के/खेलकूद वाले):1-2अंडे रोज, कभी-कभी 2-3अगर ज्यादा एक्टिव हैं। मसल बिल्डिंग और एनर्जी के लिए फायदेमंद।

	4. 19-50साल के वयस्क (स्वस्थ, सामान्य गतिविधि वाले):1-2अंडे रोज। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और कई स्टडीज के अनुसार, ज्यादातर लोगों में ये दिल की सेहत पर नकारात्मक असर नहीं डालते, बल्कि HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) बढ़ा सकते हैं। अगर हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या हार्ट प्रॉब्लम है, तो हफ्ते में 4-7अंडे तक सीमित रखें।

	5. 51साल से ऊपर के बुजुर्ग:1अंडा रोज या हर दूसरे दिन। 2025 Dietary Guidelines में बुजुर्गों के लिए अंडों को हेल्दी एजिंग के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि ये कोलीन और प्रोटीन से मसल लॉस और दिमागी स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए भी फायदेमंद।

	कैसे खाएं अंडे? 

	अंडे का सफेद हिस्सा (एग व्हाइट) लगभग कोलेस्ट्रॉल-फ्री होता है, इसलिए अगर कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो सिर्फ व्हाइट हिस्सा ज्यादा खा सकते हैं। इसके अलावा तला हुआ या ज्यादा तेल में बनाने से कैलोरी बढ़ जाती है। इसलिए उबला या पोच्ड अंडा ही खाएं। बता दें, भारत में ICMR-NIN 2024 गाइडलाइंस में अंडों को फ्लेश फूड्स ग्रुप में शामिल किया गया है और संतुलित मात्रा में लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि भारतीय आहार में प्रोटीन की कमी आम है। वहीं, अगर आप शाकाहारी हैं या अंडा नहीं खाते, तो इसकी जगह आप दालें, पनीर, नट्स और दूध ले सकते हैं, क्योंकि इनमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771922487240226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[घर बैठे होगी खांसी की जांच...AI ऐप ‘स्वासा’ देगा बीमारी की जानकारी, जानें मरीजों को मिलेंगे कितने फायदे]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/health-update-cough-testing-will-be-done-at-home-ai-app-swaasa-will-provide-information-about-the-disease</link><pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:00:15 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/health-update-cough-testing-will-be-done-at-home-ai-app-swaasa-will-provide-information-about-the-disease</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771489815190226.png"> Swaasa AI App: अब सिर्फ दो-तीन बार खांसकर स्मार्टफोन पर अपनी सांस की स्थिति जानना संभव हो गया है। हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनी सल्सिट टेक्नोलॉजीज (Salcit Technologies) द्वारा विकसित स्वासा (Swaasa) नामक AI-आधारित मोबाइल ऐप खांसी की आवाज का विश्लेषण करके अस्थमा और सीओपीडी जैसी सांस संबंधी बीमारियों का स्क्रीनिंग कर सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने इस ऐप को 460मरीजों पर किए गए ट्रायल के बाद अस्थमा और सीओपीडी की जांच के लिए हरी झंडी दे दी है।

	कैसे काम करता है स्वासा ऐप?

	ऐप बेहद सरल तरीके से काम करता है। मरीज या स्वास्थ्य कार्यकर्ता मोबाइल फोन के माइक्रोफोन के सामने 2-3बार खांसता है। साथ में उम्र, लक्षण और अन्य बुनियादी जानकारी भरनी होती है। एआई एल्गोरिदम खांसी की ध्वनि तरंगों (acoustic signatures) का विश्लेषण करता है और 8मिनट के अंदर रिपोर्ट तैयार कर देता है। रिपोर्ट में बताया जाता है कि फेफड़े सामान्य हैं या नहीं, बीमारी obstructive (अस्थमा, सीओपीडी जैसी), restrictive है या मिश्रित और इसकी गंभीरता कितनी है।

	AIIMS ट्रायल में क्या निकला?

	AIIMS के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन में डॉ. हर्षल रमेश साल्वे (एडिशनल प्रोफेसर) की टीम ने इस ऐप को गोल्ड स्टैंडर्ड स्पाइरोमेट्री टेस्ट के साथ 460मरीजों पर परखा। नतीजे सकारात्मक रहे। डॉ. साल्वे ने बताया कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर अस्थमा व सीओपीडी की पहचान में यह काफी प्रभावी साबित हुआ। सामान्य बनाम असामान्य मामलों में लगभग 90%सटीकता और विशिष्ट बीमारियों में 82-87%तक सटीकता देखी गई।

	डॉ. साल्वे ने कहा &apos;खांसी की आवाज से ही पता चल जाता है कि मरीज को कौन-सी सांस की बीमारी है और उसका स्तर क्या है। प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स में जहां स्पाइरोमेट्री उपलब्ध नहीं है, वहां यह बहुत उपयोगी साबित होगा।&apos; ट्रायल के बाद AIIMS ने इसे स्क्रीनिंग टूल के रूप में मंजूरी दे दी है। यह ऐप AIIMS के आउटरीच सेंटर्स (जैसे बल्लभगढ़) और स्वास्थ्य शिविरों में भी इस्तेमाल हो रहा है।

	मरीजों को क्या फायदे?

	1. तेज और आसान जांच:8मिनट में रिपोर्ट, बिना अस्पताल के चक्कर लगाए।

	2. सस्ती और पहुंच योग्य:ग्रामीण क्षेत्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

	3. समय पर इलाज:शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आने से गंभीर जटिलताएं टल सकती हैं। भारत में अस्थमा और सीओपीडी लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं, खासकर प्रदूषण वाले शहरों और गांवों में।

	4. गैर-आक्रामक:कोई इंजेक्शन, ब्लड टेस्ट या रेडिएशन नहीं।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771489815190226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[Haryana News:सर्दी, जुकाम और बुखार से हरियाणा में दहशत,  14 दिनों में 20 लोगों की हुई मौत]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/haryana-news-cold-cough-and-fever-create-panic-in-haryana-20-people-died-in-14-days</link><pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:00:22 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/haryana-news-cold-cough-and-fever-create-panic-in-haryana-20-people-died-in-14-days</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771241422160226.png"> Fever Causes Health Emergency: बदलते मौसम के दौरान सर्दी, जुकाम और बुखार होना आम बात है लेकिन कोई आपसे कह दे कि बुखार की वजह से एक दो नहीं बल्कि 20 लोगों की मौत हो गई है, तो क्या आप यकीन करेंगे। लेकिन, ऐसा हुआ है। हरियाणा के पलवल जिले के छैंसा गांव में मानों दहशत फैल गई हो।

	छैंसा गांव में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालत हो गए हैं। पिछले दो सप्ताह में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें से कई लोगों में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पुष्टी हुई है। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में स्वास्थ्य कैंपेन चलाया जा रहा है।

	घर-घर हो रही जांच

	छैंसा गांव में लगातार हो रही मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग एक्टिव हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम घर-घर जाकर लोगों के ब्लड सैंपल ले रही है, उन्हें पीलिया, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच कराने के लिए कहा जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों में हेपेटाइटिस के लक्षण पाए जाए रहे हैं, उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा जा रहा है। ताकी संक्रमण को फैलने से रोका जाए। रोगियों को पहले सर्दी, जुकाम और बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। जिसके बाद मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है।

	लोगों को किया जा रहा जागरूक

	इस बीच बीमारी का दूसरा पहलू भी सामने आया है। गांव के 14 साल के लड़के सारिक की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और आईसीयू बेडी की संख्या प्रयाप्त ना होने के कारण स्थिति और ज्यादा बिगड़ती चली गई। अब प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। एक तरफ हेपेटाइटिस संक्रमण को रोकना है और दूसरी तरफ दूषित पानियों और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गावंवालों की चिंताओं का हल निकालना। मौजूदा स्थिति को देखते हुए बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाए गए हैं। वहीं, स्वाथ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।  

	क्या कहना है डॉक्टर का

	वहीं, नोडल अधिकारी वासुदेव गुप्ता का कहना है कि हेपेटाइटिस-बी संक्रमण खून, संक्रमित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंधों के जरिए फैलता है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ मामले नशे के दौरान साझा की गई सुई के इस्तेमाल से जुड़े हो सकते हैं। अब स्थिति को देखते हुए प्रशासन गांव में जागरूकता अभियान चला रहा है और लोगों को जांच कराने के लिए कहा जा रहा है।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1771241422160226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[Mahashivratri 2026: कब मनाया जाएगा महाशिवरात्रि का पर्व, जल्दी नोट करें सही डेट, महत्व और व्रत की टाइमिंग]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/religiom-mahashivratri-2026-celebrated-15-february-know-here-festival-significance-and-fasting-timings</link><pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:20:30 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/religiom-mahashivratri-2026-celebrated-15-february-know-here-festival-significance-and-fasting-timings</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1770198630040226.png"> Mahashivratri Festival 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे अहम और बड़ा त्योहार माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो शिव और पार्वती के विवाह की स्मृति के साथ-साथ अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। साल 2026में महाशिवरात्रि 15फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। तो चलिए महाशिवरात्रि के व्रत, महत्व, प्रमुख मंत्रों और चार प्रहर पूजा के समय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

	2026में महाशिवरात्रि की तिथि

	हिंदू लेकिन पंचांग के अनुसार 2026में चतुर्दशी तिथि 15फरवरी को दोपहर 5:04बजे से शुरू होकर 16फरवरी को शाम 5:34बजे तक रहेगी। चूंकि महाशिवरात्रि रात्रि का पर्व है, इसलिए मुख्य उत्सव 15फरवरी की रात को होगा। व्रत रखने वाले भक्त 15फरवरी को उपवास रख सकते हैं और 16फरवरी को पारण कर सकते हैं।

	महाशिवरात्रि के व्रत का महत्व 

	महाशिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन उपवास रखकर भक्त अपने मन को शुद्ध करते हैं और रात्रि में जागकर ध्यान, भजन और पूजा करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस रात्रि शिव ने तांडव नृत्य किया था और पार्वती से विवाह किया था, जो चेतना (शिव) और ऊर्जा (शक्ति) के मिलन का प्रतीक है। यह पर्व आध्यात्मिक जागरण का अवसर प्रदान करता है, जहां अज्ञानता और अंधकार पर विजय प्राप्त की जाती है। परिवार वाले व्यक्ति भी इस व्रत से सांसारिक सुख प्राप्त कर सकते हैं, जबकि साधक इसे आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयोग करते हैं। व्रत में फलाहार या निराहार रहना चाहिए और पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है।

	महाशिवरात्रि के प्रमुख मंत्र

	महाशिवरात्रि की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व है। इन मंत्रों का जाप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए किए जाते हैं। 

	पंचाक्षरी मंत्र:ॐ नमः शिवाय। यह शिव के पांच अक्षरों वाला मूल मंत्र है, जो सभी दुखों का नाश करता है।

	महामृत्युंजय मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ यह मंत्र स्वास्थ्य, लंबी आयु और मृत्यु भय से मुक्ति प्रदान करता है।

	रुद्र गायत्री मंत्र:ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ यह ज्ञान और आध्यात्मिक विकास के लिए जपा जाता है।

	शिव ध्यान मंत्र:करचरण कृतं वाक् कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व। जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शंभो॥ यह क्षमा और शुद्धि के लिए है।

	शंभु सदाशिव मंत्र: ॐ शंभवे नमः। यह सरल मंत्र दैनिक जाप के लिए उपयुक्त है।

	चार प्रहर पूजा का समय

	महाशिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में बांटा जाता है और प्रत्येक प्रहर में पूजा की जाती है।

	पहला प्रहर 15फरवरी को इस दौरान शाम 6:11बजे से रात 9:23बजे के बीच जल से अभिषेक करें।

	दूसरा प्रहर 15फरवरी को इस दौरान रात 9:23बजे से 16फरवरी की मध्य रात्रि 12:35बजे के बीच दूध से अभिषेक करें।

	तीसरा प्रहर 16फरवरी को इस दौरान मध्य रात्रि 12:35बजे से सुबह 3:47बजे के बीच दही से अभिषेक करें।

	चौथा प्रहर 16 फरवरी को इस दौरान सुबह 3:47 बजे से 6:59 बजे के बीच शहद से अभिषेक करें।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1770198630040226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[World Cancer Day: चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं ये खतरनाक कैंसर, समय रहते पहचान कर सही डाइट करें फॉलो]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-world-cancer-day-2026-these-dangerous-cancers-are-silently-damaging-the-body-identify-them-and-follow-the-right-diet</link><pubDate>Wed, 04 Feb 2026 10:26:57 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/lifestyle-health-update-world-cancer-day-2026-these-dangerous-cancers-are-silently-damaging-the-body-identify-them-and-follow-the-right-diet</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1770181017040226.png"> Silent Cancer Symptoms: आज 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है, जो कैंसर के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इस बीमारी से लड़ने का वैश्विक अभियान है। भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं। यहां कई कैंसर ऐसे हैं जो &apos;साइलेंट किलर&apos; कहलाते हैं, क्योंकि ये शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते और चुपके से धीरे-धीरे शरीर में फैल जाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कैंसर महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्रभावित करते हैं, लेकिन जीवनशैली, प्रदूषण, मोटापा और तंबाकू जैसी आदतों के कारण भारत में इनकी संख्या बढ़ रही है। अगर समय पर इनके शुरुआती संकेतों को पहचाना जाए, तो इलाज आसान हो सकता है। तो चलिए साइलेंट कैंसर, उसके शुरुआती लक्षण, जोखिम और बचाव के उपाय जानते है। 

	 

	1. ओवेरियन कैंसर - यह महिलाओं में सबसे खतरनाक साइलेंट कैंसरों में से एक है। क्योंकि शुरुआती लक्षण अस्पष्ट होते हैं और अक्सर पेट की सामान्य समस्याओं से भ्रमित हो जाते हैं। भारत में मोटापा, आनुवंशिक कारक और हार्मोनल बदलाव के कारण इसके मामले बढ़ रहे हैं। शुरुआती लक्षणों की बात करें तो पेट में लगातार सूजन या दर्द, जल्दी पेट भर जाना, बार-बार पेशाब आना, पीठ दर्द, थकान या वजन घटना। 

	 

	2. पैंक्रियाटिक कैंसर - यह कैंसर अग्न्याशय (पैंक्रियास) में शुरू होता है और शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाता, लेकिन भारत में डायबिटीज, मोटापा और धूम्रपान के कारण इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है और अक्सर देर से पता चलता है। शुरुआती लक्षणों में पेट या पीठ में दर्द, अचानक वजन कम होना, भूख न लगना, पीलिया, थकान या नई डायबिटीज शामिल है। 

	 

	3. कोलोरेक्टल कैंसर - भारत में आंत का कैंसर युवाओं में भी बढ़ रहा है, मुख्य रूप से अस्वास्थ्यकर आहार और खराब जीवनशैली के कारण। यह साइलेंट होता है क्योंकि शुरुआती लक्षण पाइल्स या पेट की समस्या से मिलते-जुलते हैं। इसके अलावा मल में बदलाव (दस्त या कब्ज), मल में खून, अनजाने में वजन घटना, पेट दर्द या एनीमिया। 

	 

	4. लंग कैंसर - यह भारत में सबसे कॉमन कैंसरों में से एक है, फेफड़ों का कैंसर, जो धूम्रपान और प्रदूषण के कारण साइलेंट तरीके से फैलता है। गैर-धूम्रपान करने वालों में भी सेकंड-हैंड स्मोक या इंडोर प्रदूषण से खतरा रहता है। शुरुआती लक्षणों में लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या थकान जैसी समस्या हो सकती है। ये सर्दी-जुकाम समझकर अनदेखा हो जाते हैं।

	 

	5. लिवर कैंसर - भारत में हेपेटाइटिस संक्रमण और शराब के कारण यह साइलेंट कैंसर तेजी से फैल रहा है। शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन पेट दर्द, पीलिया, भूख न लगना, वजन घटना या थकान जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

	 

	6. ब्रेस्ट कैंसर - महिलाओं में सबसे आम कैंसर है और भारत में यह महिलाओं के बीच कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बन चुका है। आजकल जीवनशैली में बदलाव, मोटापा, देर से शादी-बच्चे पैदा करना और जागरूकता की कमी के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शुरुआती लक्षणों में स्तन के आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल में बदलाव या असामान्य डिस्चार्ज, स्तन या निप्पल में दर्द, सूजन जैसी समस्या शामिल है। 

	 

	बचाव के लिए डाइट में ये चीजें शामिल करें

	 

	कैंसर से बचाव में स्वस्थ आहार अहम भूमिका निभाता है। पौष्टिक भोजन कैंसर के जोखिम को 30-50% तक कम कर सकता है।  

	 

	1. फल और सब्जियां: टमाटर, गाजर, ब्रोकली, पालक और बेरीज (जैसे स्ट्रॉबेरी या ब्लूबेरी) – ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं, जो सेल डैमेज रोकते हैं।

	 

	2. मसाले: हल्दी (करक्यूमिन से भरपूर), लहसुन, अदरक और दालचीनी – ये एंटी-इंफ्लेमेटरी हैं और कैंसर सेल्स के विकास को रोक सकते हैं।

	 

	3. साबुत अनाज और फाइबर: ओट्स, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स – पाचन सुधारते हैं और कोलोरेक्टल कैंसर से बचाते हैं। 

	 

	4. नट्स और सीड्स: बादाम, अखरोट, फ्लैक्ससीड और कद्दू के बीज – ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रदान करते हैं। 

	 

	5. ग्रीन टी: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, जो लंग और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करती है।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1770181017040226.png" width="75" height="50"/></item><item><title><![CDATA[Health News: जहरीली हवा बढ़ा रही सांस की बीमारियां, रिकॉर्ड तोड़ हो रही दवाओं की बिक्री]]></title><link>https://www.khabarfast.com/news/health-news-toxic-air-increasing-respiratory-illnesses-leading-to-record-breaking-sales-of-medicines</link><pubDate>Tue, 13 Jan 2026 16:23:32 +0530</pubDate><dc:creator></dc:creator><guid isPermaLink="true">https://www.khabarfast.com/news/health-news-toxic-air-increasing-respiratory-illnesses-leading-to-record-breaking-sales-of-medicines</guid><description><![CDATA[<img src="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1768301612130126.png"> Health News: देश के कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर अब लोगों की सेहत और जेब पर साफ दिखने लगा है। जहरीली हवा की वजह से सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इसका प्रमाण दवाओं की बढ़ती बिक्री से मिल रहा है। दिसंबर, 2025 में सांस की बीमारियों की दवाओं, खासकर एंटी-एलर्जिक और एंटी-अस्थमा दवाओं की बिक्री 1,950 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है।

	क्या कहती है रिसर्च?

	मार्केट रिसर्च फर्म फार्मारैक के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 की बिक्री दिसंबर 2024 की तुलना में 10 फीसदी ज्यादा रही, जबकि 2023 के मुकाबले इसमें 18 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह साफ संकेत है कि हर साल प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय आमतौर पर प्रदूषण का पीक सीजन माना जाता है। इस तिमाही में भी सांस की दवाओं की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बिक्री 5,620 करोड़ रुपये को पार कर गई, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 17 फीसदी ज्यादा है। इसमें से करीब 3,500 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी अस्थमा और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) की दवाओं की रही।

	इन दवाओं की बढ़ी बिक्री

	अस्थमा और सांस से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली दवा फोराकॉर्ट सर्दियों के महीनों में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में शामिल रही। दिसंबर में यह 90 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा बनी, पहले स्थान पर वजन घटाने की दवा माउंजारो रही। चिकित्सकों का कहना है कि वायु प्रदूषण अस्थमा और सांस के संक्रमण को गंभीर बना देता है और लंबे समय में सीओपीडी जैसी बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

	क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

	गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थ के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. अमिताभ मलिक के मुताबिक, हवा में प्रदूषक कण बढ़ने से एलर्जिक राइनाइटिस और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या ओपीडी में करीब 60 फीसदी तक बढ़ जाती है। मास्क और एयर प्यूरीफायर काफी हद तक मददगार साबित होते हैं। फार्मारैक का कहना है कि यह ट्रेंड अब सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर और दक्षिण दोनों क्षेत्रों में एक जैसा देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में प्रदूषण अब सिर्फ मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।]]></description><media:thumbnail url="https://www.khabarfast.com/upload/news/prj_1768301612130126.png" width="75" height="50"/></item></channel></rss>