Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी और उतार-चढ़ाव के मामले में केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सरकार अब तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं कर पाई है, जबकि उसे पहले ही कई बार समय दिया जा चुका है। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें निजी एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले किराए और अन्य शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है। इस याचिका को सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दायर किया था।
कोर्ट ने सरकार से किया सवाल
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर केंद्र के वकील ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए और समय मांगा। लेकिन कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि आखिर ऐसा क्या कारण है, जिससे हलफनामा दाखिल नहीं किया जा रहा है।
सरकार की मांग हुई खारिज
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार एक आवेदन के साथ हलफनामा दाखिल करे और यह भी बताए कि देरी क्यों हुई। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन बार समय दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल न करना गंभीर मामला है। केंद्र सरकार ने तीन हफ्तों का और समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले, यानी एक हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल किया जाए।
अगली सुनवाई होगी अहम
बता दें कि पिछले साल 17 नवंबर को कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से इस याचिका पर जवाब मांगा था। याचिका में मांग की गई है कि विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था बनाई जाए। अब इस मामले में अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि कोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार को जल्द ही अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।