Haryana News : हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा सरकार अब गांवों की टूटी, अधूरी और विभागों की खींचतान में फंसी सड़कों पर बड़ा प्रशासनिक ऑपरेशन करने की तैयारी में है।
जानकारी के मुताबिक, वर्षों से ग्रामीणों के गुस्से और परेशानी का कारण बनी ‘डबल कंट्रोल’ व्यवस्था को खत्म करने के लिए सरकार बड़ा रोड रिफॉर्म प्लान तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आने वाली पांच करम तक की ग्रामीण सड़कों को लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपने पर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है। Haryana News
CM सैनी से मिली जानकारी के अनुसार, CMO अधिकारियों को इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो न केवल गांवों की सड़क व्यवस्था का पूरा ढांचा बदल सकता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क चौड़ाई और निर्माण गुणवत्ता के नए मानक भी लागू हो सकते हैं। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि PWD के अधीन आने के बाद पांच करम तक की सड़कें कम से कम 18 फुट चौड़ी विकसित की जा सकेंगी। इससे गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यातायात ज्यादा सुरक्षित और आसान बन सकेगा। किसानों को फसल मंडियों तक पहुंचाने में राहत मिलेगी, ट्रांसपोर्ट लागत घटेगी और गांवों तक विकास परियोजनाओं की पहुंच आसान होगी।
सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक, यदि सड़क निर्माण, मरम्मत और रखरखाव का पूरा सिस्टम PWD के अधीन आता है तो काम ज्यादा तेज और जवाबदेह तरीके से हो सकेगा। अभी हालात ऐसे हैं कि सड़क खराब होने पर ग्रामीणों को यह तक स्पष्ट नहीं होता कि शिकायत किस विभाग से करें। कई बार दोनों विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहते हैं। इसी वजह से सरकार अब ‘एक सड़क-एक विभाग’ मॉडल को समाधान के तौर पर देख रही है। यह बदलाव केवल सड़क ट्रांसफर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार इसके वित्तीय और प्रशासनिक प्रभावों का भी विस्तृत अध्ययन कर रही है। Haryana News
बीच में फंसे गांव
हरियाणा से मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से सबसे बड़ी समस्या सड़क निर्माण की बंटी हुई जिम्मेदारी रही है। कई गांवों में एक सड़क का आधा हिस्सा PWD के पास होता है, जबकि बाकी हिस्सा मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आता है। नतीजा यह निकलता है कि सड़क निर्माण और मरम्मत का काम समय पर पूरा ही नहीं हो पाता। Haryana News
जानकारी के मुताबिक, कई बार PWD अपने हिस्से की सड़क बना देता है, लेकिन जैसे ही मार्केटिंग बोर्ड का हिस्सा शुरू होता है, वहां काम रुक जाता है। बजट मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया और फाइलों की लंबी दौड़ के कारण महीनों तक सड़कें अधूरी पड़ी रहती हैं। कहीं सड़क चमचमाती दिखती है तो कुछ मीटर आगे गड्ढों और टूटी परतों का साम्राज्य शुरू हो जाता है। बरसात के दिनों में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं।