Bakrid Celebration Rules: इस्लाम धर्म में बकरीद (ईद-उल-अजहा) का त्योहार बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 28 मई, कल गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। जिसे परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों में यानी तीन हिस्सों में बांटा जाता है। यह त्योहार सिर्फ कुर्बानी नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का संदेश भी देता है। लेकिन क्या आप जानते है कि कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में क्यों बांटा जाता है?
गोश्त को तीन भागों में क्यों बांटा जाता है?
इस्लामी विद्वानों के अनुसार, मुसलमानों में कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया था कि कुर्बानी के मांस से कुछ खाओ, कुछ रखो और कुछ सदका (दान) करो।
पहला हिस्सा कुर्बानी करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार के लिए रखा जाता है। इससे घर में त्योहार की खुशी बांटी जाती है।
दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को उपहार के रूप में दिया जाता है। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं और सामुदायिक भाईचारा बढ़ता है।
तीसरा हिस्सा गरीबों, जरूरतमंदों को दिया जाता है। यह कुर्बानी का सबसे अहम और जरूरी सामाजिक पहलू है, जो सुनिश्चित करता है कि समाज का हर वर्ग त्योहार का आनंद ले सके।
बकरीद के जरूरी नियम
जानवर की शर्तें: बकरा/भेड़ कम से कम 1 साल का, गाय/भैंस 2 साल की, ऊंट 5 साल का होना चाहिए। जानवर स्वस्थ, बीमारी-मुक्त और बिना किसी विकृति का होना जरूरी है।
कुर्बानी का समय: 10 जुल हिज्जा (बकरीद के दिन) से लेकर 12 या 13 जुल हिज्जा तक।
कैसे करें कुर्बानी? जानवर की कुर्बानी मस्जिद, ईदगाह या निर्धारित जगह पर ही करें। सार्वजनिक सड़कों पर न करें।
गोश्त का उपयोग: कुर्बानी का गोश्त कच्चा या पका कर बांटा जा सकता है।