Agni-6 Missile: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने अग्नि-6 बैलिस्टिक मिसाइल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला पूरी तरह सरकार पर निर्भर है। जैसे ही सरकार हरी झंडी देगी, DRDO इसके विकास के लिए तैयार है। अग्नि-6 भारत की अगली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) होगी, जो 10,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने में सक्षम मानी जा रही है। यह मौजूदा अग्नि-5 का और अधिक आधुनिक व ताकतवर संस्करण होगी।
क्या है मिसाइल की खास बात?
इस मिसाइल की सबसे खास बात इसकी MIRV तकनीक है। यानी एक ही मिसाइल में कई वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकते हैं। इससे दुश्मन के लिए बचाव करना बेहद मुश्किल हो जाता है। अग्नि-6 की अनुमानित रेंज 10 से 12 हजार किलोमीटर बताई जा रही है, जबकि हल्के पेलोड के साथ यह 14 से 16 हजार किलोमीटर तक जा सकती है। इसकी वॉरहेड क्षमता करीब 3,000 किलोग्राम तक हो सकती है। यह मिसाइल 10 से 11 तक वॉरहेड ले जाने में सक्षम होगी।
कितनी होगी इसकी लंबाई
ये मल्टी-स्टेज सॉलिड फ्यूल रॉकेट पर आधारित होगी, जिसकी लंबाई 20 से 40 मीटर और वजन 55 से 70 टन के बीच हो सकता है। इसे रोड और रेल मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकेगा। भविष्य में इसका सबमरीन से लॉन्च होने वाला वर्जन भी विकसित किया जा सकता है। गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल नेविगेशन, रिंग लेजर जाइरोस्कोप और भारत का नेविगेशन सिस्टम NavIC शामिल होगा। इसकी गति करीब 30,000 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है।
प्रोटोटाइप बनाने का काम जारी
जानकारी के मुताबिक DRDO ने अग्नि-6 का डिजाइन लगभग पूरा कर लिया है और प्रोटोटाइप बनाने का काम जारी है। हालांकि, फ्लाइट टेस्ट और आगे की प्रक्रिया के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। अभी भारत के पास अग्नि-5 मिसाइल है, जिसकी रेंज 5,000 किमी से ज्यादा है। अग्नि-6 के आने से भारत की राजनीतिक ताकत और मजबूत होगी, खासकर चीन जैसे देशों के मुकाबले। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारत की सुरक्षा और न्यूक्लियर डिटरेंस को नई ऊंचाई दे सकती है।