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अल नीनो को लेकर आया बड़ा अपडेट, भारत के मानसून पर अब पहले जैसा खतरा नहीं!; जानें इसकी वजह

Nancy | 24 May, 2026

Monsoon Update: प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी के साथ अल नीनो की स्थिति भी तेजी से विकसित हो रही है। अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) और इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (IRI) की मानें तो मई-जुलाई 2026 में अल नीनो उभरने की संभावना काफी ज्यादा है। जो साल के आखिर तक एक मजबूत अल नीनो के रूप में उभर सकता है। ये स्थिति साल 2027 तक बनी रह सकती है।

अल नीनो का खतरा और उसका प्रभाव

बता दें, अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य-पूर्वी हिस्से में गर्म पानी जमा हो जाता है, जो हवाओं को कमजोर कर  वॉकर सर्कुलेशन को प्रभावित करता है। भारत में इससे मानसून की हवाएं कमजोर पड़ती हैं, खासकर मानसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में बारिश कम हो सकती है। लेकिन हर अल नीनो का प्रभाव एक जैसा नहीं होता। इस बार विकसित हो रहा अल नीनो अभी शुरुआती चरण में है, जिसकी तीव्रता पर अनिश्चितता बनी हुई है।

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भारत के मानसून को लेकर चिंताएं कम क्यों?

दरअसल, इसका सबसे बड़ा कारक पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) माना जा रहा है। वर्तमान में IOD न्यूट्रल है। IOD पश्चिमी हिंद महासागर को गर्म करता है, जो भारत की ओर नमी लाता है। IMD के अनुसार, यह अल नीनो के सूखा प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकता है, हालांकि पूरी तरह बेअसर नहीं। तो वहीं, यूरेशियन स्नो कवर उत्तरी गोलार्ध में जनवरी-मार्च का स्नो कवर औसत से कम रहा, जो आमतौर पर अच्छे मानसून का संकेत माना जाता है।

इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग का अतिरिक्त नमी भी इसका कारक है। अब अगर इसके ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बात करें तो  पिछले 70 सालों में 17 प्रमुख अल नीनो घटनाओं में से कम से कम 5 में भारत को सामान्य या ज्यादा बारिश मिली। हालांकि, मजबूत अल नीनो भी हमेशा सूखा नहीं लाता।