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Makar Sankranti 2026: किस दिन है संक्रांति का स्नान? जानें दान का शुभ मुहूर्त और विधि

Parth Jha | 13 Jan, 2026
Makar Sankranti 2026: धनु राशि से सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। ये पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और इसमें स्नान, दान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान कई जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाता है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है।

कब है संक्रांति की तिथि?

इस साल मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी कनफ्यूजन है। कुछ लोग इसे 14 जनवरी को तो कुछ 15 जनवरी को मनाने की तैयारी कर रहे हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यही सूर्य का मकर राशि में गोचर मकर संक्रांति कहलाता है।

किस दिन है स्नान? 

हालांकि, धार्मिक कार्य जैसे स्नान, दान, पूजा-पाठ, जप-तप आदि सभी 15 जनवरी को किए जाएंगे। इस बार संक्रांति और षटतिला एकादशी का पर्व 14 जनवरी को पड़ रहा है। करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब संक्रांति और एकादशी की तिथि एक ही दिन पड़ रही है। ज्योतिषाचारियों के अनुसार, ये संयोग अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।

क्या है स्नान की विधि? 

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों जैसे गंगा और यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान का सबसे शुभ समय सूर्योदय से दोपहर तक का माना जाता है। यदि संभव हो तो सूर्य के उदय के समय स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। जो लोग नदी या तीर्थ स्थल नहीं जा सकते, वे घर पर भी विधि-विधान से स्नान कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

घर पर स्नान के लिए सुबह उठकर ईश्वर का ध्यान करें और मन ही मन स्नान का संकल्प लें। नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें, तिल और अगर संभव हो तो थोड़ा कुश या तुलसी जल मिलाएं। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।

मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल या वस्त्र का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस बार भी श्रद्धालु इस पर्व के दौरान स्नान, दान और पूजा-पाठ करके अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करेंगे।