Labour Day History: आज 1 मई 2026 को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस से मनाया जा रहा है। यह दिन श्रमिकों के योगदान, उनके संघर्ष और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। इस दिन लाखों मजदूर रैलियां, परेड और कार्यक्रमों के जरिए एकजुटता दिखा रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस का इतिहास
अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस का इतिहास 19वीं शताब्दी के अमेरिका से जुड़ा हुआ है। दरअसल, 01 मई 1886 को अमेरिका के हजारों मजदूरों ने दिन में 8 घंटे के काम की मांग को लेकर बड़ी हड़ताल की। यह आंदोलन शिकागो में सबसे तेज था। 4 मई को हे मार्केट स्क्वायर में एक रैली के दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें पुलिस फायरिंग में कई मजदूर मारे गए। इस घटना को हेमार्केट दंगा के नाम से जाना जाता है।
जिसके बाद 1889 में पेरिस में दूसरी अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस ने इस घटना की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित किया। इसके बाद से यह दिन दुनिया भर में मजदूर वर्ग की एकजुटता और अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाने लगा। दूसरी तरफ, भारत में भी 1923 से चेन्नई में इसकी शुरुआत हुई, जो आजतक चली आ रही है। इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है।
अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस का महत्व
बता दें, यह दिन उन लाखों श्रमिकों की याद दिलाता है जो समाज की नींव रखीं। किसान, फैक्टरी वर्कर, ड्राइवर, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक सभी ने निस्वार्थ भाव के देश की सेवा की। आप किसी भी संस्थान में काम करते हो सभी के लिए 8 घंटे काम, उचित मजदूरी, सुरक्षित कार्यस्थल जरूरी है। इसके अलावा यह दिन बाल श्रम और समानता जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है। इस दिन को और ज्यादा खास बनाने के लिए कई देशों में सार्वजनिक अवकाश होता है। तो कहीं रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस का थीम
इस साल अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस 2026 का थीम है 'बदलते जलवायु में कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना - Ensuring Safety and Health at Work in a Changing Climate.' इस थीम के तहत काम के तनाव, वर्कलोड, मानसिक स्वास्थ्य के साथ मौसम, पर्यावरणीय बदलावों के कारण श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर जोर देना है।