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अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, भारत में तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव

Shivani Jha | 10 May, 2026

Petrol Diesel Price: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट में रुकावट आने से भारत में एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि केंद्र सरकार ने समय रहते कई कदम उठाकर हालात को संभालने की कोशिश की है। सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया। कुछ ही दिनों में गैस उत्पादन 36 हजार टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम लोगों को राहत देने की कोशिश की गई।

तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव

इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां पिछले करीब 10 हफ्तों से पुराने दाम पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक उछाल आ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों को रोजाना 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। पिछले 10 हफ्तों में यह घाटा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई है। वहीं पाकिस्तान, ब्रिटेन और कई दूसरे देशों में ईंधन के दाम तेजी से बढ़े हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि देश में तेल और गैस की सप्लाई बाधित न हो। हालांकि भारत का लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल, 90 फीसदी एलपीजी और 65 फीसदी एलएनजी आयात प्रभावित हुआ है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो तेल कंपनियों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला सरकार को लेना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में बदलाव पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है।

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