Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुराने और पसंदीदा गाड़ी वाहन रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को राहत भरी खबर दी है। अदालत ने साफ किया है कि अगर पुराने वाहन नंबरों को एचआर सीरीज में बदलने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने 14 से अधिक याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस फैसले को अवैध करार दिया है, जिसके तहत पसंदीदा नंबरों को नई सीरीज में बदलने के लिए फिस देना पड़ रहा था।
क्या है पूरा विवाद
आपको बता दें कि मामला उन नंबरों से जुड़ा था मोटर वाहन अधिनियम 1998 लागू होने से पहले जारी हुए थे। इन नंबरों की शुरुआत एचआर के बजाए पुरानी सीरीज के अक्षरों से होती थी। वाहन मालिकों का कहना था कि सरकार पहले कई बार कोर्ट में कह चुकी है कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना कोई फिस बदला जाएगा लेकिन, 2019 को जारी आदेश में सरकार ने पसंदीदा नंबरों के लिए शुल्क लेने का ऐलान किया था।
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन पंजीकरण नंबरों की वैधता और उनसे जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार इस विषय में अपने स्तर पर नियम बनाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार ने केवल मेमो और सर्कुलर के तहत शुल्क वसूली की नीति बनाई, जबकि कानून बनाने का अधिकार उनके पास नहीं है। इसलिए यह आदेश अवैध है। कोर्ट ने कहा कि पुराने नंबरों को सामान मूल्य वाले नए नंबरों में बदला जा सकता है।