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चीन की हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारत में निवेश की मिली मंजूरी, नए FDI नियम लागू

Shivani Jha | 03 May, 2026

FDI Rule Change: भारत सरकार ने विदेशी निवेश को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे चीन से जुड़ी कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी। वित्त मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी कर उन विदेशी कंपनियों को भारत में ऑटोमेटिक रूट से निवेश की अनुमति दे दी है, जिनमें चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 फीसदी तक है। यह नया नियम 1 मई 2026 से लागू हो चुका है। इस फैसले के पीछे DPIIT के 2020 के प्रेस नोट-3 में किया गया बदलाव है, जिसे मार्च में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी।

अब जिन विदेशी कंपनियों में चीन की हिस्सेदारी सीमित यानी 10% तक है, वे भारत के उन सेक्टर में निवेश कर सकती हैं, जहां पहले से एफडीआई की अनुमति है। हालांकि, सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं। ये नियम उन कंपनियों पर लागू नहीं होंगे जो सीधे तौर पर चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों में रजिस्टर्ड हैं। यानी इन देशों की कंपनियों को अभी भी भारत में निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेनी होगी।

असली मालिक की पहचान  है अहम

नए नियमों में ‘बेनिफिशियल ओनर’ यानी असली मालिक की पहचान को अहम माना गया है। अगर किसी कंपनी में किसी व्यक्ति या संस्था की हिस्सेदारी 10% से ज्यादा है, तभी उसे महत्वपूर्ण माना जाएगा। यह नियम PMLA के प्रावधानों के अनुसार तय किया गया है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी साफ किया है कि मल्टीलेटरल बैंक या ऐसे फंड, जिनमें भारत सदस्य है, उन्हें किसी एक देश की इकाई नहीं माना जाएगा। यानी उनके निवेश को किसी खास देश से जुड़ा नहीं समझा जाएगा।

इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी बहुत कम रही है। चीन 0.32% हिस्सेदारी के साथ 23वें स्थान पर है और कुल निवेश करीब 2.51 अरब डॉलर रहा है। सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में भी बड़ा बदलाव किया है। अब बीमा कंपनियों में 100% विदेशी निवेश ऑटोमेटिक रूट से संभव होगा। हालांकि, LIC के मामले में यह सीमा 20% ही रहेगी। इस फैसले को भारत में निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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