Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Update: लंबे समय से बुलेट ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल, भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (Bullet Train) अब अपने अंतिम चरण में है। रेल मंत्रालय ने अनुमान जताया है कि साल 2029 तक देश को पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस कॉरिडोर में लगभग 56% से ज्यादा काम पूरा हो गया है। सैकड़ों किलोमीटर वायाडक्ट, ब्रिज और ट्रैक बेड तैयार हो चुके हैं।
🚆 Railway’s biggest TBM cutter head lowered at Vikhroli, Mumbai
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) May 17, 2026
✅ 350‑tonne, 13.6m diameter engineering feat for India’s Bullet Train project pic.twitter.com/6r4QuoT1wi
MAHSR परियोजना की खासियत
508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 320 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। जिसके जरिए मुंबई से अहमदाबाद का पूरा सफर मात्र 2 घंटे में पूरा हो जाएगा। वर्तमान में यह सफर 6-8 घंटे में पूरा होता है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय मदद से तैयार किया जा रहा। यह परियोजना न सिर्फ मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा आसान बनाएगा, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार देगा। इससे औद्योगिक केंद्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन
मुंबई-अहमदाबाद के बीच बने इस कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन बनेंगे। इनमें मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), ठाणे, विरार, बोईसर, स्टेशन शामिल हैं। जबकि गुजरात के वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, अहमदाबाद, साबरमती (टर्मिनल) और वडोदरा स्टेशन शामिल हैं। बता दें, इस कॉरिडोर के तहत अब तक 17 नदी पुलों का काम पूरा हो चुका है। गुजरात में नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती जैसी बड़ी नदियों पर और महाराष्ट्र में 4 नदी पुलों पर काम जारी है।
फ्लाइट जैसी मिलेगी सुविधाएं
1. आधुनिक डिजाइन: जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित, लेकिन स्वदेशी BEML और ICF द्वारा विकसित ट्रेनसेट।
2. कम्फर्ट: एयरक्राफ्ट जैसी सीटिंग, पर्याप्त लेग स्पेस, वाई-फाई, पावर सॉकेट और शानदार इंटीरियर।
3. सुरक्षा: अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा फीचर्स, भूकंप प्रतिरोधी डिज़ाइन।
4. पर्यावरण अनुकूल: अधिकांश ट्रैक एलिवेटेड वायाडक्ट पर, न्यूनतम भूमि अधिग्रहण और कम कार्बन उत्सर्जन।